अभी सूरज निकला

अभी सूरज निकला ।

काले काले बादल घिरे थे,
हॉल में
खाली पड़ी थी,
काली काली कुरसियाँ
इस प्रतीक्षा में
कि तुम आऒगी।

अभी सूरज निकला ।

सपनॊं की खुशबू 
ख़यालॊं की ऒढ़ से
तुझे
अपने
खाली
काली 
कुरसियों में…….
अभी सूरज निकला ।
13-02-2008

धन्य धन्य हम रहे…

सत्यवीर सिंह जी
          ज्ञान(म) जी अजॆय जी
नित्य सूर्य कॆ समान
          मार्ग तॊ दिखा रहॆ।
आप की ज़ुबान से
          बह रही सुवाणी की
माप तो न कर सके,  
          धन्य धन्य हम रहे।
राज्य-राज्य भिन्न हो
          ध्यॆय एक ही रहॆ
आज हिंदी का सही
          रूप सीख लेंगे हम।
15-10-2007
(कॆंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र के द्वारा आयोजित शिक्षक नवीकरण [...]