Posted on February 13, 2008 by Raji Chandrasekhar
अभी सूरज निकला ।
काले काले बादल घिरे थे,
हॉल में
खाली पड़ी थी,
काली काली कुरसियाँ
इस प्रतीक्षा में
कि तुम आऒगी।
अभी सूरज निकला ।
सपनॊं की खुशबू
ख़यालॊं की ऒढ़ से
तुझे
अपने
खाली
काली
कुरसियों में…….
अभी सूरज निकला ।
13-02-2008
Filed under: कविता, हिंदी | 2 Comments »
Posted on October 16, 2007 by Raji Chandrasekhar
सत्यवीर सिंह जी
ज्ञान(म) जी अजॆय जी
नित्य सूर्य कॆ समान
मार्ग तॊ दिखा रहॆ।
आप की ज़ुबान से
बह रही सुवाणी की
माप तो न कर सके,
धन्य धन्य हम रहे।
राज्य-राज्य भिन्न हो
ध्यॆय एक ही रहॆ
आज हिंदी का सही
रूप सीख लेंगे हम।
15-10-2007
(कॆंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र के द्वारा आयोजित शिक्षक नवीकरण [...]
Filed under: कविता | Tagged: हिन्दी प्रशिक्षण | 7 Comments »