रजी चंद्रशेखर

अपने समग्र साहित्यिक प्रयासों को
यहाँ प्रस्तुत करना चाहता हूँ ।
हिंदी, अंग्रेज़ी और मलयाळम की रचनाएँ
आप यहाँ पढ़ सकते है ।
प्रार्थना है
कि आप लोग मेरी ओर भी ध्यान देने की क्रुपा करें ।

अभी सूरज निकला

अभी सूरज निकला ।

काले काले बादल घिरे थे,
हॉल में
खाली पड़ी थी,
काली काली कुरसियाँ
इस प्रतीक्षा में
कि तुम आऒगी।

अभी सूरज निकला ।

सपनॊं की खुशबू 
ख़यालॊं की ऒढ़ से
तुझे
अपने
खाली
काली 
कुरसियों में…….
अभी सूरज निकला ।
13-02-2008

मौखिक परीक्षा

1. मौखिक परीक्षा क्या है ?
यदि परीक्षक को किसी परीक्षार्थी से विरोध है तो उससे बदला लेने का अवसर है मौखिक परीक्षा ।

मुझे भी कुछ कहना है।

केंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर की ओर से संचालित, 19 दिन (8-10-2007 से 26-10-2007 तक) के शिक्षक नवीकरण कार्यक्रम की समाप्ति के अवसर पर मुझे भी कुछ कहना है।
संपूज्य गुरुजनो, समादरणीय प्रतिभागी अध्यापक वृंद, सबको मेरा नमस्कार ।
मैं सर्वप्रथम यहाँ उपस्थित गुरुजनों के चरणों पर नतमस्तक होता हूँ और कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ कि मुझे इस समापन सम्मेलन [...]

धन्य धन्य हम रहे…

सत्यवीर सिंह जी
          ज्ञान(म) जी अजॆय जी
नित्य सूर्य कॆ समान
          मार्ग तॊ दिखा रहॆ।
आप की ज़ुबान से
          बह रही सुवाणी की
माप तो न कर सके,  
          धन्य धन्य हम रहे।
राज्य-राज्य भिन्न हो
          ध्यॆय एक ही रहॆ
आज हिंदी का सही
          रूप सीख लेंगे हम।
15-10-2007
(कॆंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र के द्वारा आयोजित शिक्षक नवीकरण [...]