केंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर की ओर से संचालित, 19 दिन (8-10-2007 से 26-10-2007 तक) के शिक्षक नवीकरण कार्यक्रम की समाप्ति के अवसर पर मुझे भी कुछ कहना है।
संपूज्य गुरुजनो, समादरणीय प्रतिभागी अध्यापक वृंद, सबको मेरा नमस्कार ।
मैं सर्वप्रथम यहाँ उपस्थित गुरुजनों के चरणों पर नतमस्तक होता हूँ और कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ कि मुझे इस समापन सम्मेलन में दो शब्द बोलने का अवसर प्रदान किया है।
हम जानते है, गत उन्नीस दिनों से यहाँ शिक्षक नवीकरण कार्यक्रम हो रहा था जिसके संचालक केंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर के तीन मनीषी विद्वान रहे, डॉ. ज्ञानम जी, डॉ. अजेय पंड़ित जी, और डॉ. सत्यवीर सिंह जी। यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि इतने दिनों तक हिंदी के इन विद्वान अध्यापकों के साथ हम विभिन्न भाषा विषयों के विवेचन, विश्लेषण करते हुए बिता सके। इस संदर्भ में यह स्पष्ट करतॆ हुए हमें अत्यंत प्रसन्नता है कि इस अवधि में इतने सारे विषय मिल सके, विषयों की इतनी गहराई में हम जा सके जिनकी कल्पना भी हम नहीं कर सकते थे।
भाषाविज्ञान, व्याकरण, साहित्य आदि विभिन्न विषयों पर क्लास हुए, भाषण हुए, चर्चा हुई। शिक्षण के संदर्भ में भी शिक्षण सिद्धांतों को लेकर समग्रता से अध्ययन हुआ जिससे हम सारे अध्यापक अत्यंत लाभान्वित हुए। इन चर्चाओं और प्रतिचर्चाओं का फल यह निकला कि हमने जान लिया कि हमें शिक्षा और शिक्षण के मार्ग पर और अन्यान्य विषयों पर और अधिक ज्ञान प्राप्त करके आगे बढ़ना है। हमारे समक्ष नवदीप जलानेवाले अन्य आचार्य थे- डॉ. वी. के. एस. नंपूतिरी, श्री के. जी. बालकृष्ण पिल्लै, और श्री सदानंदन।
इस कार्यक्रम का अत्यंत लाभदायक पहलू यही रहा कि हमें अपने अपने विषयों को गहरई से जानने और उनको शोधपूर्वक देखने-परखने की असाधारण प्रेरणा मिल गयी।
इस अध्ययन परंपरा के अत्यंत आकर्षक अन्य कई कार्यक्रम भी रहे जिनका उल्लेख किए बिना मेरे ये शब्द अपूर्ण ही रहेंगे। उनमें विनोदयात्रा, साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम, केरल वाणी हस्तलिखित पत्रिका, परियोजना, मौखिक परीक्षा जैसे कार्य हमारे स्कूली-शिक्शण के संदर्भ में मार्गदर्शन प्रदान करने में सक्षम रहे हैं।
मौखिक परीक्षा में अपना नाम चंद्रशॆखर को लेकर कई प्रश्न हुए जिनके सिलसिले में चंद्रचूड़ शब्द आया, जिसमें चूड़ शब्द का विश्लेषण करके ये मेरा सुधार किया था। M. A. का ’कला निष्णात’ अनुवाद करके उन्होंने उस अंग्रेज़ी शब्द का हिंदी में सही रूप समझा दिया।
हमें कुछ नए सुहृद्वरों को भी मिला जिनका सौहार्द्द भावि जीवन केलिए भी लाभप्रद सिद्ध होगा। यहाँ के सभी प्रतिभागी किसी न किसी कारणवश उल्लेख योग्य बन गए है। तथापि मान्यवर प्रभन जी का विशेष उल्लेख करना आवश्यक है जिन्होंने अपनी जादूगरी से हम सब को अभिभूत कर दिया।
कुल मिलाकर यह शिक्षक नवीकरण कार्यक्रम हमारे अध्ययन और अध्यापन के मार्ग में दीपशिखा के समान प्रज्ज्वलित रहेगा। एतदर्थ हम इसके संचालकों और गुरुजनों के प्रति आभारी हैं। सब को एक बार फिर कॄतज्ञता ज्ञापित करते हैं।
धन्यवाद।
Filed under: निबंध






राजी जी, क्या आप मैसूर वाली संस्थान से संबद्ध हैं?
आलोक जी,
इधर तिरुवनन्तपुरम (केरल) में संस्थान की ओर से शिक्षक नवीकरण कार्यक्रम था। आज उसकी समाप्ती थी। में भी एक प्रतिभागी था।
चन्द्रशेखर जी,
आपकी हिन्दी पढ़कर मन गदगद हो गया। मेरा खयाल है कि ऐसी उच्च हिन्दी तो उत्तर-भारत में भी कोई लाखों में एक लिख पायेगा।
आपने कथ्य को भी बहुत सफलता पूर्वक प्रस्तुत किया है। साधुवाद!
कभी-कभी मलयालम के चिट्ठों (ब्लागों) में चर्चित मुख्य विषयों और मुद्दों के बारे में भी हिन्दी चिट्ठाजगत को बतायें तो और आनन्द आये।
इसके अलावा कभी यह भी बतायें कि हिन्दी चिट्ठाजगत, मलयालम चिट्ठाजगत से क्या सीख सकता है? हिन्दी चिट्ठाजगत में आपको किस बात की कमी दिखती है?