धन्य धन्य हम रहे…
Posted on October 16, 2007 by Raji Chandrasekhar
सत्यवीर सिंह जी
ज्ञान(म) जी अजॆय जी
नित्य सूर्य कॆ समान
मार्ग तॊ दिखा रहॆ।
आप की ज़ुबान से
बह रही सुवाणी की
माप तो न कर सके,
धन्य धन्य हम रहे।
राज्य-राज्य भिन्न हो
ध्यॆय एक ही रहॆ
आज हिंदी का सही
रूप सीख लेंगे हम।
15-10-2007
(कॆंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र के द्वारा आयोजित शिक्षक नवीकरण कार्यक्रम के संदर्भ में…)
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बहुत अच्छा.
परंतु और अच्छा होगा यदि आप हिन्दी के लिए अलग से खाता बनाकर उसे सिर्फ हिन्दी में ही रखते.
उम्मीद है कि आप हिन्दी में नियमित लिखा करेंगे व अपनी भाषा की स्तरीय सामग्री को हिन्दी में भी प्रस्तुत करेंगे.
हिन्दी ब्लॉगर्स के बीच आपकी चर्चा होगी । बधाई ।
[...] किया कि उन्होंने वर्डप्रेस पर एक हिन्दी-कम-मलयालम ज्यादा चिट्ठा शुरु किया है । रवि रतलामीजी ने [...]
आभारी हूँ, रवि जी, अफ़्लतून जी और शैशव जी
चन्द्रशेखर जी,
आपको हमने चिट्ठाजगत.इन में जोड़ा है,
यहाँ आपके ब्लॉग से हिन्दी लेख स्वचालित तरीके छाँट कर सूचित किए जाएँगे।
स्वागत है आपका।
शुभकामनाएं
चन्द्रशेखर जी, आपका यह प्रयास सराहनीय है। आशा है कि इससे हिन्दी को मलयाली के साथ-साथ लोकप्रियता के मार्ग पर बढ़ने में सहाअता मिलेगी, और आपके चिट्ठे को एक बड़ा पाठक वर्ग। रवि जी की सलाह पर भी ध्यान दीजियेगा।